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Body Part by Bio Printer

साइंस एंड टेक

आने वाले समय में हम रोगी के शरीर की ज़रूरत के हिसाब से एकदम सही आकार व सही पैमानों पर कृत्रिम अंग प्रिंट कर सकेंगे।

अंग खराब?
तो बायो-प्रिंटर से नया बना लीजिए!

ह र साल गुर्दे के लाखों मरीज केवल इसलिए मौत के शिकार हो जाते हैं क्योंकि प्रत्यारोपण के लिए गुर्दे दान करने वाले लोग ही नहीं मिल पाते। यही बात शरीर के दूसरे अंगों के बारे में भी कही जा सकती है, जैसे- आंखें। लेकिन आने वाले दिनों में तकनीक इस समस्या का भी समाधान कर सकती है। इस तकनीक को बायो-प्रिंटिंग कहते हैं जो लगभग 3-डी प्रिंटिंग जैसी ही है। फर्क है तो इस बात का कि यहां पर कोई चीज़ नहीं बल्कि इंसानों के भीतर फिट किए जा सकने वाले अंग प्रिंट किए जाते हैं।

यह अविश्वसनीय लगता है, लेकिन इस दिशा में काफी प्रयोग किए जा चुके हैं। ताजा प्रयोग कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी (सैन डिएगो) में किया गया है। जैसा कि शुरुआती प्रयोगों के मामले में होता है, यह प्रयोग चूहों पर किया गया है और इसके नतीजे चौंकाने वाले हैं। शोधकर्ताओं ने रीढ़ की हड्डी का एक हिस्सा बायो-प्रिंटिंग के जरिए तैयार किया जिसे सर्जरी के दौरान ‘मरीज’ की रीढ़ में खराब हिस्से की जगह पर फिट किया गया। जैसा कि जिक्र किया जा चुका है, मरीज था एक चूहा। प्रयोग सफल रहा। शाओचेन चेन नामक नैनो-इंजीनियरिंग प्रोफेसर और मार्क टस्ज़ीन्स्की नामक न्यूरो साइंटिस्ट की अगुआई वाली टीम ने यह कर दिखाया।

कैसे बनाई कृत्रिम रीढ़ की हड्डी?

वैज्ञानिकों ने पहले बायो-प्रिंटर की मदद से सॉफ्ट जेल के जरिए रीढ़ की हड्डी के एक छोटे से हिस्से का निर्माण किया। फिर बायो-प्रिंटर की मदद से ही उसके भीतर-बाहर स्टेम कोशिकाओं को भर दिया गया। स्टेम कोशिकाएं खुद को संबंधित अंग के अनुरूप ढालने में सक्षम होती हैं। जब रीढ़ की हड्डी का यह कृत्रिम टुकड़ा तैयार हो गया तो उसे चूहे की पीठ में उस जगह पर फिट कर दिया गया जहां पर असली अंग खराब था।

समय बीतने के साथ यह टुकड़ा न सिर्फ रीढ़ की हड्डी के साथ बहुत अच्छी तरह से जुड़ गया बल्कि उसके आसपास नई कोशिकाएं और अक्षतंतु (Axons) भी उग आए। ये सब कृत्रिम रूप से बनाए गए हिस्से से जुड़ गए और कुछ समय बाद सब कुछ इस तरह एक-मेक हो गया जैसे वह रीढ़ की हड्डी का कुदरती हिस्सा हो। उसके बाद वह शरीर के वाहिका तंत्र (सर्कुलेटरी सिस्टम) से भी जुड़ गया और रक्त के संचार से लेकर तमाम दूसरी प्रक्रियाएं शुरू हो गईं। सब कुछ वैसा ही हुआ मानो किसी दूसरे चूहे की रीढ़ की हड्डी से हिस्सा निकालकर वहां फिट किया गया हो।

बायो-प्रिंटिंग अगली क्रांति?

बायो-प्रिंटिंग चिकित्सा के क्षेत्र में अगली बड़ी क्रांति ला सकती है क्योंकि तब हम किसी भी रोगी के शरीर की ज़रूरत के हिसाब से एकदम सही आकार में और सही पैमानों पर कृत्रिम अंगों को प्रिंट कर सकेंगे। तब शायद अंगदाता के शरीर की प्रकृति, आयु, ब्लड ग्रुप जैसी सीमाएं भी कोई बाधा नहीं बनेंगी।

नोट करने की बात यह है कि बायो-प्रिंटिंग में अंगों की प्रिंटिंग के लिए जिंदा कोशिकाओं का उपयोग होता है। इन्हें बायो-इंक कहा जाता है। इस बायो-इंक का इस्तेमाल कंप्यूटर-निर्देशित नलिका के जरिए जिंदा कोशिकाओं की परतें तैयार करने में किया जाता है। हालांकि अब तक बायो-प्रिंटरों में कम से कम 200 माइक्रोन आकार तक की ही प्रिंटिंग की जा सकती थी, लेकिन कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के इस समूह ने सिर्फ एक माइक्रोन के आकार तक बायो-प्रिंटिंग करने में कामयाबी हासिल की। यही वजह थी कि शोधकर्ता और वैज्ञानिक बेहद सटीक ढंग से कृत्रिम अंग का निर्माण कर सके।

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की यही टीम पहले कृत्रिम लिवर और कृत्रिम हृदय की भी बायो-प्रिंटिंग कर चुकी है। उधर, वेक फॉरेस्ट इंस्टीट्यूट ऑफ रिजेनरेटिव मेडिसिन के बायो-इंजीनियरों ने 3-डी प्रिंटेड मस्तिष्क बनाने का प्रयास किया है। उन्होंने एक मस्तिष्क बना भी लिया है जिसे उन्होंने ‘ऑर्गनॉइड’ नाम दिया है क्योंकि फिलहाल यह इंसानी मस्तिष्क की बराबरी करने की स्थिति में नहीं है। लेकिन टेक्नॉलॉजी एकदम सही रास्ते पर बढ़ रही है और ताज्जुब नहीं होना चाहिए कि कुछ साल बाद हम अपनी ज़रूरत के लिहाज से खराब या क्षतिग्रस्त अंगों को बदलने में बायो-प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल कर सकें। तब यह शायद यह उतनी ही सामान्य बन जाएगी, जैसे कि अस्पतालों में एक्सरे या फिजियोथैरेपी हुआ करती हैं।


Family

Delivery of Seven Babies in Iraq

इराक: 25 साल की महिला ने सात बच्चों को जन्म दिया, इनमें 6 बेटियां और एक बेटा; सभी स्वस्थ 

इराक के दीयाली में 25 वर्षीय एक महिला ने 12 फरवरी को एक साथ 7 बच्चों को जन्म दिया है। इनमें 6 बेटियां और एक बेटा है। अस्पताल प्रशासन ने महिला का नाम उजागर नहीं किया है। जन्म के बाद मां और उसके सभी बच्चे स्वस्थ हैं। उधर, मध्य-पूर्वी देशों में इसे पहला मामला बताया जा रहा है। महिला के पति योसेफ फदल ने बताया, ‘उन्होंने और उनकी पत्नी ने इतने परिवार के बारे में कल्पना भी नहीं की थी। अब उनके ऊपर 10 लोगों की जिम्मेदारियां आ गई हैं। गौरतलब है कि इससे मिलता-जुलता एक मामला लेबनान से भी आया था।
 1997 में अमेरिका के लोवा से एक साथ 7 बच्चों को जन्म देने का मामला सामने आया था। यह दुनिया का पहला मामला था।
 इसके बाद लेबनान में एक महिला ने 6 बच्चों को एक साथ जन्म दिया था। इनमें 3 बेटे और 3 बेटियां शामिल थीं।

Transport

Discount in Air Fair to Senior Citizen

सीनियर सिटीजन को विमान के बेसिक किराए में मिलती है 50 फीसदी तक छूट

आज देश में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एेसे में एक उपभोक्ता के तौर पर यदि हमको यह पता हो कि एयरलाइंस हमें क्या-क्या सुविधाएं देती हैं तो हम इसका फायदा उठा सकते हैैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि अगर आप की उम्र 60 साल है तो आपको देश में यात्रा करने पर विमान किराए में छूट मिल सकती है। यह छूट बेसिक किराए पर मिलती है और अलग-अलग एयरलाइंस के हिसाब से छह से 50 फीसदी तक हो सकती है।
विमान किराए में सर्वाधिक छूट एयर इंडिया देता है। एयर इंडिया 60 साल व उससे अधिक उम्र के यात्रियों को बेसिक किराए पर 50 प्रतिशत की छूट देता है। यदि हम निजी एयरलाइंस की बात करें तो यह छूट छह से आठ फीसदी है। इस छूट का लाभ हासिल करने के लिए हमें टिकट संबंधित एयरलाइंस की साइट पर ही बुक करानी होती है। बुक कराते समय सीनियर सिटीजन का विकल्प भी चुनना होता है। यहां पर यह भी ध्यान रखें कि यह छूट सिर्फ बेसिक किराए पर होती है और बाकी सभी चार्ज इस पर देने होते हैं। इसके अलावा कई एयरलाइंस कुछ सीटें ही सीनियर सिटीजन डिस्काउंट के लिए रखती हैं। इसलिए टिकट जल्दी बुक कराने पर ही इसका लाभ मिल पाता है। सीनियर सिटीजन कोटे से बुक टिकट पर बेव चेक-इन की सुविधा नहीं होती है। इसकी बड़ी वजह यह है कि यात्री की उम्र को वेरिफाई करके ही एयरलाइनें चेक-इन करवाती हैं। अगर चेक-इन के समय यात्री अपनी उम्र के दस्तावेज पेश करने में विफल रहता है ताे उसे छूट के रूप में मिली राशि को देने के बाद ही यात्रा की अनुमति मिलती है। यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि कुछ एयरलाइनें तय रूटांे और इकॉनॉमी क्लास में ही यह छूट उपलब्ध कराती हैं। इसलिए विमान यात्रा से पहले सीनियर सिटीजन को इस बारे में पूरी जानकारी लेकर ही अपनी टिकट बुक करानी चाहिए।
पात्रता की शर्तें- कोई भी भारत का नागरिक जो स्थायी तौर पर यहींं रहता हाे और यात्रा शुरू करने की तिथि को 60 साल का हो चुका हो वह इस छूट को हासिल कर सकता है। आयु व पते के सत्यापन के लिए वह सरकार द्वारा जारी किसी भी ऐसे आईडी कार्ड को दिखा सकता है, जिसमें उसकी फोटो लगी हो और उसकी उम्र लिखी हो। इसमें वोटर कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि शामिल हैं। एयर इंडिया यह छूट देश में कहीं भी जाने पर देता है। हालांकि, कई एयरलाइनें चुनिंदा सेक्टरों पर ही यह छूट देती हैं। एयर इंडिया के पीआरओ प्रवीण भटनागर ने बताया कि टिकट बुक कराते समय सीनियर सिटीजन के विकल्प को क्लिक करने पर आपको मूल किराए में 50 फीसदी छूट मिल जाएगी। हालांकि जेट, इंडिगो, गो एयर व स्पाइसजेट जैसी निजी एयरलाइंस बेसिक किराए पर छह से आठ फीसदी छूट ही देती हैं। इस छूट को पाने के लिए टिकट कम से कम एक हफ्ते पहले खरीदना होता है। आप एयर इंडिया में यात्रा से एक साल पहले तक टिकट खरीद सकते हैं। इस तरह से खरीदे टिकट को आप कैंसिल भी करवा सकते है, लेकिन उसके लिए आपको शुल्क देना पड़ेगा। आप शुल्क देकर अपनी यात्रा की तिथि भी बदलवा सकते हैं। लेकिन, टिकट पर नाम में परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
यह भी ध्यान रखें- यह छूट सिर्फ बेसिक किराए पर ही मिलती है, इसलिए कई बार यह काफी कम होती है। इसके अलावा एयरलाइनें कई तरह के ऑफर भी पेश करती है, जो इस छूट से बेहतर हो सकते हैं। इसलिए सीनियर सिटीजन को सभी तरह के ऑफर या अन्य डिस्काउंट के बारे में पता करके ही टिकट बुक कराना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि जिस एयरलाइंस पर डिस्काउंट ले रहे हैं कहीं दूसरी एयरलाइंस का सामान्य टिकट उससे सस्ता तो नहीं है।
ऐसे कर सकते हैं शिकायत- यदि आपको उपभोक्ता के तौर पर किसी वस्तु या सेवा से जुड़ी कोई समस्या है तो उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के पास शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर- 1800-11-4000 पर कॉल कर सकते हैं या 8130009809 पर एसएमएस भी कर सकते हैं।
संसार का हर व्यक्ति कंज्यूमर है। वो अपने जन्म के दिन से ही किसी न किसी वस्तु का उपभोग शुरू कर देता है। इसमें कई बार हमें धोखा मिलता है, तो कई बार भरोसा कर हम ठगे भी जाते हैं। ऐसे में हम इस सीरीज़ में आपको उन अधिकारों और मामलों के बारे में बताएंगे जिन्हें जानना जरूरी है।

Art and Culture

नर्मदा जयंती महोत्सव 2019

लहरों पर झिलमिलाते दीप ऐसे दिखे मानों जमीं पर उतर आए सितारे 

एमपी: नर्मदा जयंती महोत्सव 2019 

होशंगाबाद|15 साल बाद सेठानी घाट के जलमंच पर अाने का कांग्रेस काे माैका मिला। नर्मदा जयंती महाेत्सव के दाैरान सेठानी घाट पर जनसंपर्क मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री पीसी शर्मा ने मां नर्मदा का अभिषेक किया। शर्मा ने कहा कांग्रेस सरकार अमरकंटक से भरूच तक नर्मदा परिक्रमा पथ का काम शुरू कराएगी। प्रभारी मंत्री ने जलमंच से कांग्रेस के वचन पत्र की बातें फिर गिनाईं। उन्होंने कहा पवित्र नदियों के लिए न्यास कमलनाथ सरकार बनाएगी। नर्मदा नदी के लिए काेर्इ समझाैता नहीं करेंगे। नर्मदा जयंती महाेत्सव में हजारों श्रद्धालु माैजूद रहे। नर्मदा की लहरेंं असंख्य दीपों से जगमग हो उठीं।

monuments, Uncategorized

Atal Samark

बिना कोई पेड़ काटे सदैव अटलसमाधि बनकर तैयार, 25 को पहली प्रार्थना सभा, पीएम-राष्ट्रपति समेत आएंगे कई विपक्षी नेता 

भारत रत्न पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि को सदैव अटलनाम दिया गया है 

पूर्व पीएम भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि स्थल ‘सदैव अटल’ बनकर तैयार है। अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन 25 दिसंबर को पहली प्रार्थना सभा अटल स्मृति न्यास की तरफ से रखी गई है। इसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और पीएम समेत विपक्षी दलों के नेताओं को भी कार्ड भेजे गए हैं। फिलहाल समाधि की फिनिशिंग और सजावट का काम चल रहा है।
अटल स्मृति न्यास के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा ने भास्कर से बातचीत में बताया कि समाधि निर्माण में अटल जी के पर्यावरण प्रेम को ध्यान में रखकर इस तरह से समाधि बनाई गई है कि एक भी पेड़ काटने की जरूरत नहीं पड़ी, जहां पूर्व पीएम का संस्कार हुआ था। उससे थोड़ा हटकर समाधि बनाई गई है। प्रो. मल्होत्रा ने तर्क दिया कि जहां संस्कार हुआ था, उस जगह को संस्कार स्थल बना दिया गया है। आगे जिस तरह से दीन दयाल उपाध्याय के संस्कार के लिए निगम बोधघाट में बने स्थल पर बड़े नेताओं के संस्कार होते हैं, उसी तरह अब इस जगह पर कोई बड़ा नेता, पूर्व पीएम या पूर्व राष्ट्रपति की मृत्यु की दशा में वहीं संस्कार हुआ करेंगे।
7 एकड़ में फैला है राष्ट्रीय स्मृति स्थल, सदैव अटल 1.5 एकड़ में है
भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि को ‘सदैव अटल’ नाम दिया गया है। पूर्व पीएम का 18 अगस्त, 2018 को निधन हुआ था और राष्ट्रीय स्मृति स्थल में 17 अगस्त को अंतिम संस्कार किया गया था। इस कॉम्प्लेक्स में राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, आर वेंकटरमन, शंकर दयाल शर्मा, के आर नारायण, प्रधानमंत्री आईके गुजराल, पीवी नरसिंह राव, चंद्र शेखर की समाधि पहले से है। राष्ट्रीय स्मृति 7 एकड़ में फैला है, जिसमें अटल बिहारी वाजपेयी की समाधि स्थल के लिए 1.5 एकड़ जमीन तय थी।
दीवारों पर अटल जी की कविताओं की पंक्तियां
सदैव अटल समाधि निर्माण में भव्यता का भी ध्यान रखा गया है। निर्माण में लाइटिंग का खूब इस्तेमाल है। समाधि के कमल फूल आकार में बनाने के साथ बीच में एक पारदर्शी पत्थर है, जिसमें रात को लाइट ज्योति की तरह दिखाई देगी। समाधि के चारो तरफ 8 दीवारें हैं जिस पर, मौत की उम्र क्या? दो पल भी नहीं, जिंदगी-सिलसिला, मैं जी भर जिया जैसी कविताएं लिखीं हुई हैं।