Transport

Discount in Air Fair to Senior Citizen

सीनियर सिटीजन को विमान के बेसिक किराए में मिलती है 50 फीसदी तक छूट

आज देश में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एेसे में एक उपभोक्ता के तौर पर यदि हमको यह पता हो कि एयरलाइंस हमें क्या-क्या सुविधाएं देती हैं तो हम इसका फायदा उठा सकते हैैं। आज हम आपको बता रहे हैं कि अगर आप की उम्र 60 साल है तो आपको देश में यात्रा करने पर विमान किराए में छूट मिल सकती है। यह छूट बेसिक किराए पर मिलती है और अलग-अलग एयरलाइंस के हिसाब से छह से 50 फीसदी तक हो सकती है।
विमान किराए में सर्वाधिक छूट एयर इंडिया देता है। एयर इंडिया 60 साल व उससे अधिक उम्र के यात्रियों को बेसिक किराए पर 50 प्रतिशत की छूट देता है। यदि हम निजी एयरलाइंस की बात करें तो यह छूट छह से आठ फीसदी है। इस छूट का लाभ हासिल करने के लिए हमें टिकट संबंधित एयरलाइंस की साइट पर ही बुक करानी होती है। बुक कराते समय सीनियर सिटीजन का विकल्प भी चुनना होता है। यहां पर यह भी ध्यान रखें कि यह छूट सिर्फ बेसिक किराए पर होती है और बाकी सभी चार्ज इस पर देने होते हैं। इसके अलावा कई एयरलाइंस कुछ सीटें ही सीनियर सिटीजन डिस्काउंट के लिए रखती हैं। इसलिए टिकट जल्दी बुक कराने पर ही इसका लाभ मिल पाता है। सीनियर सिटीजन कोटे से बुक टिकट पर बेव चेक-इन की सुविधा नहीं होती है। इसकी बड़ी वजह यह है कि यात्री की उम्र को वेरिफाई करके ही एयरलाइनें चेक-इन करवाती हैं। अगर चेक-इन के समय यात्री अपनी उम्र के दस्तावेज पेश करने में विफल रहता है ताे उसे छूट के रूप में मिली राशि को देने के बाद ही यात्रा की अनुमति मिलती है। यहां यह भी ध्यान देने वाली बात है कि कुछ एयरलाइनें तय रूटांे और इकॉनॉमी क्लास में ही यह छूट उपलब्ध कराती हैं। इसलिए विमान यात्रा से पहले सीनियर सिटीजन को इस बारे में पूरी जानकारी लेकर ही अपनी टिकट बुक करानी चाहिए।
पात्रता की शर्तें- कोई भी भारत का नागरिक जो स्थायी तौर पर यहींं रहता हाे और यात्रा शुरू करने की तिथि को 60 साल का हो चुका हो वह इस छूट को हासिल कर सकता है। आयु व पते के सत्यापन के लिए वह सरकार द्वारा जारी किसी भी ऐसे आईडी कार्ड को दिखा सकता है, जिसमें उसकी फोटो लगी हो और उसकी उम्र लिखी हो। इसमें वोटर कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस आदि शामिल हैं। एयर इंडिया यह छूट देश में कहीं भी जाने पर देता है। हालांकि, कई एयरलाइनें चुनिंदा सेक्टरों पर ही यह छूट देती हैं। एयर इंडिया के पीआरओ प्रवीण भटनागर ने बताया कि टिकट बुक कराते समय सीनियर सिटीजन के विकल्प को क्लिक करने पर आपको मूल किराए में 50 फीसदी छूट मिल जाएगी। हालांकि जेट, इंडिगो, गो एयर व स्पाइसजेट जैसी निजी एयरलाइंस बेसिक किराए पर छह से आठ फीसदी छूट ही देती हैं। इस छूट को पाने के लिए टिकट कम से कम एक हफ्ते पहले खरीदना होता है। आप एयर इंडिया में यात्रा से एक साल पहले तक टिकट खरीद सकते हैं। इस तरह से खरीदे टिकट को आप कैंसिल भी करवा सकते है, लेकिन उसके लिए आपको शुल्क देना पड़ेगा। आप शुल्क देकर अपनी यात्रा की तिथि भी बदलवा सकते हैं। लेकिन, टिकट पर नाम में परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
यह भी ध्यान रखें- यह छूट सिर्फ बेसिक किराए पर ही मिलती है, इसलिए कई बार यह काफी कम होती है। इसके अलावा एयरलाइनें कई तरह के ऑफर भी पेश करती है, जो इस छूट से बेहतर हो सकते हैं। इसलिए सीनियर सिटीजन को सभी तरह के ऑफर या अन्य डिस्काउंट के बारे में पता करके ही टिकट बुक कराना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि जिस एयरलाइंस पर डिस्काउंट ले रहे हैं कहीं दूसरी एयरलाइंस का सामान्य टिकट उससे सस्ता तो नहीं है।
ऐसे कर सकते हैं शिकायत- यदि आपको उपभोक्ता के तौर पर किसी वस्तु या सेवा से जुड़ी कोई समस्या है तो उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के पास शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर- 1800-11-4000 पर कॉल कर सकते हैं या 8130009809 पर एसएमएस भी कर सकते हैं।
संसार का हर व्यक्ति कंज्यूमर है। वो अपने जन्म के दिन से ही किसी न किसी वस्तु का उपभोग शुरू कर देता है। इसमें कई बार हमें धोखा मिलता है, तो कई बार भरोसा कर हम ठगे भी जाते हैं। ऐसे में हम इस सीरीज़ में आपको उन अधिकारों और मामलों के बारे में बताएंगे जिन्हें जानना जरूरी है।

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Roadways Strike in Haryana Ends

हरियाणा में 16 अक्टूबर से जारी रोडवेज हड़ताल आखिरकार 18वें दिन हाईकोर्ट के संज्ञान लेने के बाद खत्म हो गई। शुक्रवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी की कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां कोर्ट ने रोडवेज कर्मचारियों के साथ-साथ दूसरी कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों को पेश होने के लिए बुलाया था। कोर्ट ने कर्मचारियों को 3.15 तक हड़ताल खत्म करने का आदेश दिया था। 3.15 के बाद जब कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई तो कर्मचारियों ने कोर्ट को हड़ताल खत्म करने का आश्वासन दिया है और कहा है कि शनिवार से हरियाणा रोडवेज सड़कों पर दौड़ने लगेगी।

गुरुवार को कोर्ट में हरियाणा रोडवेज हड़ताल के मुद्दे पर हुई थी सुनवाई

  1. इससे पहले सुबह चीफ जस्टिस की कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई थी। जिसमें कोर्ट ने यूनियन को 12.30 बजे तक हड़ताल खत्म कर कोर्ट को नोटिफाई करने के लिए बोला था लेकिन कोई भी यूनियन कर्मचारी हाईकोर्ट नहीं पहुंचा। इसके बाद 2 बजे फिर से सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने यूनियन के पदाधिकारियों को दोपहर 3.15 बजे तक हड़ताल खत्म करने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा है कि लोग परेशान हो रहे हैं, दीपावली अच्छे से मनाने के लिए हड़ताल खत्म करें।
  2. लोग परेशान हो रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि किसी भी कर्मचारी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा और एस्मा के तहत कार्रवाई नहीं होगी। कोर्ट ने कहा है कि वह कर्मचारियों की हड़ताल को सुनने के लिए तैयार है, लेकिन इससे पहले जनता के हित के लिए हड़ताल को खत्म करें। कोर्ट में यूनियन के नेता बलवान सिंह के साथ सवाल- जवाब हुए। कोर्ट ने कहा है कि 12 तारीख को यूनियन नेता और सरकार के नुमाइंदे के बीच बैठक करवाकर मामले को हल किया जाएगा।
  3. बता दें कि गुरुवार को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने फैसला लिया था कि रोडवेज से जुड़े सभी मुद्दों की सुनवाई उनकी कोर्ट में होगी। हाईकोर्ट ने रोडवेज यूनियन व अन्य कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों को तलब किया था। इन्हें शुक्रवार को कोर्ट में मौजूद रहने के आदेश दिए गए थे।
  4. गुरुवार को चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी एवं जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ के समझ एडवोकेट अरविंद सेठ ने पिछले कई दिनों से हरियाणा रोडवेज के कर्मियों द्वारा हड़ताल की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि इस वजह से परिवहन व्यवस्था ठप पड़ी है। हड़ताल में अन्य विभागों के कर्मचारी भी शामिल होने लगे हैं। इससे राज्य में बिजली, पानी और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है।
  5. चीफ जस्टिस ने इसे गंभीर मुद्दा करार देते हुए दोपहर दो बजे सुनवाई तय की और उस दौरान एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन को पेश होने को कहा। मामले में अनुपम गुप्ता को हाईकोर्ट का सहयोग दिए जाने के लिए नियुक्त किया गया था। गुरुवार दोपहर दो बजे याचिका पर सुनवाई हुई तो हरियाणा के एडवोकेट जनरल ने बताया कि हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के समक्ष मामला चल रहा है।
  6. पिछले वर्ष रोडवेज यूनियन ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया था कि वह हड़ताल पर नहीं जाएंगे। बावजूद इसके यूनियन ने हड़ताल का एलान किया। सिंगल बेंच ने अब यूनियन के नेताओं के खिलाफ अवमानना के तहत सुनवाई आरंभ कर दी है। चीफ जस्टिस ने इस जानकारी के बाद सिंगल बेंच के समझ चल रही मुख्य याचिका और अवमानना याचिका को भी अपने पास सुनवाई के लिए मंगवा लिया।
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Railway General Ticket on Mobile App

रेलवे / मोबाइल एप्लीकेशन पर बुक कर सकते हैं जनरल टिकट, रेलवे ने 1 नवंबर से शुरू की सुविधा

यात्री मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से पेपरलेस यात्रा टिकट, सीजन टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट बुक कर सकेंगे। रेलवे ने 1 नवंबर से यह सुविधा शुरू कर दी है। जनरल टिकट को मोबाइल एप्लिकेशन में ही वितरित किया जाएगा। यात्री टिकट की हार्डकॉपी के बिना भी यात्रा कर सकेंगे। सफर के दौरान जब टीटीई टिकट मांगेगा तो यात्री एप में ‘शो टिकट’ विकल्प का उपयोग कर के अपनी टिकट दिखा सकेंगे।

पेपरलेस टिकटिंग को बढ़ावा देने के लिए रेलवे ने उठाया कदम

  1. रेलवे ने पेपरलैस टिकटिंग को बढ़ावा देने के लिए गुरुवार एक नई शुरुआत कर दी है। कागज रहित टिकट बुक करने के लिए यात्री का स्मार्टफोन इंटरनेट सुविधा से लैस होना जरूरी है। मोबाइल एैप पर रिजर्व की गई जनरल पेपरलेस टिकट को रद्द करने के अनुमति नहीं होगी।
  2. पेपरलेस टिकट बुक करने के बाद यात्रा एक घंटे के भीतर शुरू होनी चाहिए। सीजन टिकट मोबाइल एप्लिकेशन से जारी किया जा सकता है। यह टिकट बुकिंग के अगले दिन से वैध होगा। इसके साथ ही प्लेटफॉर्म टिकट को भी रेलवे के मोबाइल एप से बुक किया जा सकेगा।
  3. रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि यात्री मोबाइल पर टिकट नहीं दिखा पाएगा तो उसे बिना टिकट मानकर जुर्माना वसूला जाएगा। उत्तर रेलवे दिल्ली के पीआरओ दीपक कुमार ने बताया कि यात्री को एंड्रॉयड मोबाइल फोन पर गूगल एप स्टोर से रेलवे का एप डाउनलोड करना होगा। इसके बाद रेलवे ई-वॉलेट बनाने के लिए एक पंजीकरण आईडी संख्या मिलेगी। ई-वॉलेट को टॉप अप करने के लिए क्रेडिट या डेबिट कार्ड के जरिए आईआरसीटीसी की वेबसाइट का उपयोग करें। इसका दूसरा विकल्प किसी भी रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर पर भी उपलब्ध होगा, जहां ई-वॉलेट को टॉप अप कराया जा सकेगा। इसके बाद आसानी से जनरल टिकट बुक हो सकेगी।
Transport

New Airport: Sikkim

जागरण संवाददाता, गंगटोक : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को शाम में हेलीकॉप्टर से गंगटोक के लिविंग स्थित सेना के हेलीपैड पर पहुंचे। सोमवार की सुबह प्रधानमंत्री गंगटोक में पाक्यांग एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। हेलीपैड पर सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग ने प्रधानमंत्री की अगवानी की। लिविंग स्थित हेलीपैड से उनका काफिला राजभवन पहुंचा। लगभग दो किलोमीटर लंबे रास्ते के दोनों किनारे लोगों की भीड़ ने प्रधानमंत्री का स्वागत किया। उनकी एक झलक पाने के लिए लोग व्याकुल दिखे।

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Vendors may Sell Food in Trains

वेंडर ट्रेन में बेच सकेंगे खानपान का सामान

दीपक बहल’अंबाला|
अब प्लेटफार्म पर खड़ी ट्रेन में वेंडर खानपान की सामग्री बेच सकेंगे। पहले यह गैर कानूनी था और दोषी पाए जाने पर छह माह की सजा होती थी। रेल मंत्रलय ने 18 सितंबर को सभी जोन को अधिकार दे दिया है कि वे स्टॉल मालिकों को ट्रेन में सामान बेचने की अनुमति दे सकते हैं। इस फैसले से रेलवे एक्ट की धारा 144 की पकड़ ढीली होगी, लेकिन आय बढ़ेगी और अवैध वेंडरों पर शिकंजा कसेगा।
ट्रेनों में खानपान का सामान धड़ल्ले से बेचा जाता रहा है। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ऑपरेटिंग और कामर्शियल विभाग की इसे रोकने की जिम्मेदारी होती है। समय- समय पर विजिलेंस और स्पेशल टीमें भी छापामारी करती रहीं, लेकिन अवैध वेंडरों पर अंकुश नहीं लग सका। आखिर रेलवे ने सीमित आजादी देते हुए प्लेटफार्म पर खड़ी ट्रेन में खानपान की सामग्री बेचने की अनुमति दे दी। इसके लिए स्टॉल मालिक को अलग से लाइसेंस लेना होगा। किस-किस ट्रेन में सामान बेचने का अनुमति होगी, इस संबंध में दिशा निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे। अधिकृत वेंडर ट्रेन में घूम-घूम कर सामान बेच सकेंगे।
स्टेशन पर फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम्स और अन्य खानपान की स्थायी यूनिटों को इसका लाभ मिलेगा।1 हालांकि कितने वेंडरों को यह अधिकार मिलेगा, इसका निर्धारण जोनल रेलवे या फिर संबंधित मंडल तय करेगा। इससे अवैध वेंडरों पर शिकंजा कसेगा। अपराध के कारण लगा दी थी|
पाबंदी: ट्रेनों में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए रेलवे ने ट्रेनों में पंजीकृत वेंडरों पर भी पाबंदी लगा रखी थी।दीपक बहल’अंबाला

Transport

Railway Complaint: Online

ऑनलाइन दर्ज होगी रेल यात्रियों की शिकायत

आरपीएफ के पास होगा रेल यात्रियों की शिकायतों का ब्योरा

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राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली : रेलवे स्टेशन परिसर या फिर सफर के दौरान ट्रेन में यात्रियों के साथ होने वाली वारदात की शिकायत अब ऑनलाइन दर्ज होगी। इससे यात्री को अपनी शिकायत को लेकर इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। साथ ही इससे रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के हेल्पलाइन नंबर पर झूठी शिकायत करने वालों पर अंकुश लग सकेगा।1आरपीएफ के कंट्रोल रूम में ऑटोमैटिक कॉल डायवर्ट मशीन लगाई जा रही है। इसके लगने के बाद आरपीएफ हेल्पलाइन नंबर पर आने वाली शिकायतों का अपने आप पंजीकरण हो जाएगा। शिकायत पंजीकृत होते ही एक विशेष नंबर यात्री व संबंधित रेलवे स्टेशन के आरपीएफ थाने को भेजा जाएगा। इस नंबर के आधार पर यात्री को दी जाने वाली मदद को आरपीएफ ऑनलाइन अपडेट करेगी। रेल यात्रियों की सुविधा के लिए आरपीएफ ने 182, राजकीय रेल पुलिस (जीआरपी) ने 1512 और रेलवे ने 138 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। यात्रियों की सुरक्षा से संबंधित शिकायत 182 एवं 1512 पर की जाती है। वहीं खानपान व अन्य मामलों की शिकायत 138 नंबर पर की जाती है। कोई यात्री 182 नंबर पर कॉल करता है तो यह सूचना आरपीएफ के कंट्रोल रूम में पहुंचती है। वहां पर तैनात कर्मचारी शिकायत को रजिस्टर में दर्ज करता है। उसके बाद उस स्टेशन के आरपीएफ को इसकी सूचना दी जाती है जहां ट्रेन पहुंचने वाली होती है। कई बार कर्मचारियों की गलती या लापरवाही से यात्रियों की शिकायत सही ढंग से दर्ज नहीं होती है। परिणाम स्वरूप पीड़ित यात्री को मदद नहीं मिल पाती है। इसमें सुधार करने के लिए सभी रेल मंडलों के आरपीएफ कंट्रोल रूम में ऑटोमैटिक कॉल डायवर्ट मशीन लगाने की योजना है। इससे यात्रियों की शिकायतों का सही ढंग से निपटारा किया जा सकेगा। साथ ही शिकायत का पूरा रिकॉर्ड भी आरपीएफ के पास होगा। गलत शिकायत करने वालों की भी पहचान हो सकेगी।

Transport

Road Rage Case against Navjot Siddhu

रोड रेज मामला: सिद्धू के खिलाफ सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट फिर तैयार

भास्कर न्यूज | नई दिल्ली

पंजाब के स्थानीय निकाय मंत्री और कांग्रेसी नेता नवजोत सिंह सिद्धू की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। 30 साल पुराने रोडरेज मामले में पीड़ित पक्ष की रिव्यू पिटीशन को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। घटना रोडरेज के दौरान बुजुर्ग की मौत से जुड़ी है। जस्टिस एएम खानविलकर और संजय किशन कौल की बेंच ने फैसले की समीक्षा के लिए दायर याचिका पर सिद्धू को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। 15 मई को सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को इस मामले में सिर्फ एक हजार रुपए का जुर्माना किया था। कोर्ट ने कहा था कि रोड रेज में हुई मौत के लिए सिद्धू को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
ये है मामला…
1988 में नवजोत सिंह सिद्धू पटियाला में कार से कहीं जा रहे थे और उस समय गुरनाम सिंह नामक एक बुजुर्ग से उनका झगड़ा हो गया। बताया जाता है कि गुरनाम सिंह और उनके बीच वादविवाद हुआ जिसके बाद सिद्धू अपना आपा खो बैठे। उन्होंने गुरनाम सिंह को थप्पड़ जड़ दिया जिसमें उनकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने नवजोत सिंह सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था। निचली अदालत ने नवजोत सिंह सिद्धू को सबूतों के अभाव में 1999 में बरी कर दिया था। लेकिन पीड़ित पक्ष निचली अदालत के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा। 2006 में हाईकोर्ट ने इस मामले में नवजोत सिंह सिद्धू को दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ नवजोत सिंह सिद्धू सुप्रीम कोर्ट गए। सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई 2018 को सिर्फ जुर्माना लगाकर सिद्धू को बरी कर दिया।